आज दिनांक को उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष, सुषमा सिंह द्वारा प्रदेश में महिला उत्पीड़न की गम्भीर घटनाओं पर रोकथाम और पीडि़त महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाये जाने के उद्देश्य से विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों/विभिन्न इलेक्ट्रानिक मीडिया के चैनलों पर प्रकाशित/प्रसारित घटनाओं का स्वतः संज्ञान लेते हुये सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारी/पुलिस आयुक्त/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक को पत्र एवं नोटिस भेजते हुए कृत कार्यवाही की आख्या मांगी गयी।मा. उपाध्यक्ष, श्रीमती सुषमा सिंह द्वारा लिये गये स्वतः संज्ञान घटनाओं का क्रमशः बिन्दुवार विवरण-1. विभिन्न ‘‘सोशल मीडिया‘‘ माध्यमों पर प्रसारित/प्रकाशित लोनी इलाका जनपद गाजियाबाद में ‘‘महिला ने एसएसपी ऑफिस के बाहर आत्मदाह का प्रयास किया‘‘ विषयक घटना।2. दैनिक समाचार पत्र ‘‘नवभारत टाइम्स‘‘ में प्रकाशित अछनेरा तहसील के रायभा गांव जनपद आगरा में ‘‘आगरा में ठाकुरों ने चिता से उतरवा दिया नट महिला का शव‘‘ विषयक घटना।3. विभिन्न ‘‘सोशल मीडिया‘‘ माध्यमों पर प्रसारित/प्रकाशित जनपद लखनऊ में हरदोई से आयी ‘‘रेप से पीडि़त मासूम बच्ची को लखनऊ के किसी हॉस्पिटल में नही मिला इलाज‘‘ विषयक घटना।4. विभिन्न ‘‘सोशल मीडिया‘‘ माध्यमों पर प्रसारित/प्रकाशित जनपद लखनऊ के हसनगंज थाना क्षेत्र स्थित अवध वाटिका में ‘‘महिला और बच्चे का कमरे में लटकते मिला शव‘‘ विषयक घटना। उक्त के अतिरिक्त मा. उपाध्यक्ष, श्रीमती सुषमा सिंह ने उत्तर प्रदेश के एन.जी.ओ द्वारा ‘‘लॉकडाउन के दौरान महिलाओं एवं बाल अधिकारों के प्रति एन.जी.ओ की भूमिका‘‘ विषयक आयोजित वर्चुअल वेबिनार में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया गया। उपाध्यक्ष, सुषमा सिंह ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान महिलाओं एवं बाल अधिकारों को ध्यान में रखते हुये एन.जी.ओ. ने जरूरतमंद महिलाओं तक राहत सामग्री पहुँचायी, यह भी एन.जी.ओ के लिये प्रेरणादायक है। बैठक में मा. उपाध्यक्ष के साथ आयोग की मा. सदस्य श्रीमती निर्मला दीक्षित द्वारा विशिष्ठ अतिथि के रूप प्रतिभाग किया गया।
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