
युवाओं के भविष्य को चैपट करने वाली सरकार को जगाने के लिए ‘थाली बजाओ-ताली बजाओ’ अभियान को एनएसयूआई, युवा कांग्रेस का समर्थन। भयंकर रूप से बढ़ती बेरोजगारी और गड्डे में गिरती अर्थव्यवस्था से देश के युवाओं का भविष्य खतरे में है जिससे छात्र-युवा हताश और निराश है।
कनिष्क पाण्डेय
लखनऊ, जब युवा रोजी-रोटी की चिंता में नौकरी मांगता है, रुकी हुई परीक्षाएं कराने और अटकी हुई भर्तियां घोषित करने की मांग करता है तो देश के प्रधानमंत्री कुत्ता पालने, खिलौना बनाने की सलाह देते हैं जिससे कि साफ साफ जाहिर होता है कि प्रधानमंत्री का शिक्षा और युवा के भविष्य से कोई सरोकार नहीं है।
बेरोजगारी का मतलब लाखों ज़ख़्मों से मौत है, हालांकि नवउदारवादी अर्थशास्त्री अक्सर उन्हे केवल असहज आँकड़े के रूप में देखते आए है। लॉकडाउन के पहले या उसके दौरान और उसके बाद भारत में बेरोजगारी के भयंकर रूप से बढ़े स्तर का मतलब है कि करोड़ों लोग, और उनके परिवार, मुश्किल से ज़िंदा हैं। वे अनिश्चितता और निराशा से घिरे हुए हैं और या तो दान पर या अमानवीय रूप से कम मजदूरी पर गुज़र-बसर कर रहे हैं जो मजदूरी उन्हे कुछ छिटपुट काम के बदले मिलती है। उनके पास जो भी नकदी, क़ीमती सामान या अनाज की बचत थी वह लंबे समय पहले खत्म हो चुकी थी, जिसके चलते कई लोग कर्ज़ के बोझ में धस गए है। भारत की कामकाजी उम्र की आबादी का बड़ा हिस्सा जो युवा है को अपना भविष्य अंधकारमय नज़र आ रहा है क्योंकि उन्हे उनकी आंखों के सामने नौकरियां गायब होती नज़र आ रही हैं।
कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में भी प्रधानमंत्री द्वारा 20 लाख करोड़ के हवा हवाई पैकेज में युवाओं के हित के लिए कुछ भी ना मिलना युवाओं के साथ सरकार का छलावा है। आगामी 5 सितंबर को देश के युवाओं द्वारा इस भीषण बेरोजगारी व सरकारी अव्यवस्था के खिलाफ 5 सितम्बर को 5 बजे 5 मिनट थाली-ताली बजाकर विरोध दर्ज कराने का आह्वान किया गया है। उत्तर प्रदेश एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस, छात्रों-युवाओं के इस आह्वान का पूर्ण समर्थन करती है और अपने सभी कार्यकर्ताओं और छात्र युवा साथियों से इस अभियान में भाग लेने की अपील करती है।

























