Saturday, February 14, 2026
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जय श्रीराम नारे से मुख्यमंत्री का अपमान कैसे हो सकते हैं..?

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ममता बनर्जी का रवैया पश्चिम बंगाल और देश के लिए अच्छा नहीं है।समारोह अयोध्या में नहीं कोलकाता में हुआ था।जय श्रीराम के नारे एक मुख्यमंत्री का अपमान कैसे हो सकते हैं…?

एस0पी0मित्तल

देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सुभाष चंद्र बोस से जुड़े एक समारोह में जब जय श्रीराम के नारे लगे तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे अपना अपमान माना और भाषण देने से मना कर दिया। हालांकि मंच पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी बैठे थे। हो सकता है कि ममता के लिए प्रधानमंत्री की उपस्थिति कोई मायने नहीं रखती हो, क्योंकि ममता बनर्जी पूर्व में नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री मानने से इंकार कर चुकी हैं। लेकिन ममता को इस सच्चाई को स्वीकार करना होगा कि जय श्रीराम के नारे भगवान राम के जन्म स्थल अयोध्या में नहीं लगे बल्कि उनके गृह महानगर कोलकाता में लगे और वह भी तब जब प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से ठीक पहले ममता बनर्जी ने कोलकाता में 9 किलोमीटर पैदल मार्च निकाला।

सब जानते हैं कि 23 जनवरी को केन्द्र सरकार ने सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर पराक्रम दिवस मनाया और उसी उपलक्ष्य में कोलकाता में समारोह आयोजित किया गया। केन्द्र सरकार के पराक्रम दिवस को नकारते हुए ममता ने कोलकाता में 9 किलोमीटर का पैदल मार्च निकाला था। इतने लम्बे पैदल मार्च के बाद भी यदि कोलकाता में ममता बनर्जी को जय श्रीराम के नारे सुनने पड़े तो फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क्या कर सकते हैं..?

ममता का मोदी पर गुस्सा उतारना उचित नहीं माना जा सकता। यह माना की ममता बनर्जी की हिन्दू देवी देवताओ से नाराज़गी हैं, क्योंकि पूर्व में कोलकाता में दुर्गा पूजा के आयोजनों पर भी रोक लगा दी गई थी। सवाल यह भी है कि जय श्रीराम के नारों से ममता बनर्जी का अपमान कैसे हो सकता है? भगवान श्रीराम तो भारत की सनातन संस्कृति के अराध्य देव हैं। यदि किसी नेता के सामने श्रीराम के जयघोष के नारे लगते हैं तो यह उस नेता का अपमान नहीं सम्मान है। ममता बनर्जी को तो गर्व करना चाहिए कि जब वे बोलने लगी तो पूरा कोलकाता जयश्री राम के नारे से गूंज गया। इतने सम्मान को भी ममता अपना अपमान समझती है तो फिर ममता की मानसिकता को भी समझा जा सकता है।

पश्चिम बंगाल में तीन माह बाद ही विधानसभा के चुनाव होने हैं। चुनाव को लेकर ममता अपनी अलग छवि बनाने में लगी हुई है। इसलिए वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सीधे निशाना बना रही हैं। यह बात अलग है कि गत लोकसभा के चुनाव में मोदी के नेतृत्व में ही भाजपा ने 42 सीटों में से 18 सीटें जीती थीं। मौजूदा विधानसभा में भाजपा के मात्र तीन विधायक है, जबकि ममता के नेतृत्व वाली टीएमसी के 211 विधायक हैं। लेकिन ममता को जयश्री राम के नारों से डर लगने लगा है। विधानसभा में कुल 294 सदस्य हैं। जानकार सूत्रों के अनुसार बंगाल में 27 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की मानी जा रही है, जबकि बंगालियों की आजादी 22 प्रतिशत ही है।